
रविवार से तुरतुरिया में तीन दिवसीय मेला प्रारंभ हो रहा है जिसमें लाखों श्रद्धालु अपनी मन्नते पूरी होने पर पहाड़ा वाली मां काली का दर्शन करने जाते हैं। मेले में दुकानें लग चुकी है। कसडोल क्षेत्र के तुरतुरिया में पौष पूर्णिमा में हर वर्ष तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। जिसकी तैयारी चल रही हैं और दुकानें लगाकर सजना शुरू हो गई हैं। इस वर्ष मेला आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खास सुरक्षा और आवागमन की व्यवस्था की गई है।
मान्यता अनुसार बलभद्र कुंड से निकलने वाला जल गौ मूख से निकलता है, और तूर तूर की जल के ध्वनि के कारण इस स्थान का तूरतुरिया नाम पड़ा है, वही इसे लव कुश की जन्म स्थली कहा जाता है। वही माता गढ़ में मां काली की प्रतिमा विराजमान है, जिसे संतानदात्री के रूप में जाना जाता है, श्रद्धालु माता के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद लेने आते है, माता पहाड़ावाली को संतान दात्रि माता कहा जाता है और श्रद्धांलु माता से मन्नत मागने आते है। मन्त्रत पूरी हो जाने पर माता का धन्यवाद करने उनके दर पर पहुंचते है। मेला स्थल पूर्णतः जनपद पंचायत की देखरेख में संचालित किया जाता है। मेला स्थल में इस वर्ष श्रृद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए पर्याप्त पुलिस बल के साथ चाक चौबंद व्यवस्था की गई है। मेले में स्वास्थ्य विभाग की भी टेंट लगी हुई है।
पशु बलि को लेकर की जाएगी निगरानी
मेला स्थल में गायत्री यज्ञ का भी आयोजन किया गया है जिसमें क्षेत्र गायत्री परिवार के सदस्य उपस्थित रहकर गायत्री यक्ष सम्पन्न कराएंगे। इसके साथ ही कसडोल क्षेत्र के विभिन्न संगठन के लोग मेला स्थल में अथवा मंदिर परिसर में किसी प्रकार की पशु बलि दिए जाने पर प्रतिबंधित करते हुए घूमते रहेंगे। वहीं समिति के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरतुरिया में किसी प्रकार की पशु बलि पर रोक लगाए।

