
बलौदाबाजार। जिले से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई
है, जिसने पूरे स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी है। ग्राम छेरकाडीह जारा में एक ‘झोलाछाप सरपंच’ की लापरवाही ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया। मामूली सर्दी-खांसी का इलाज कराने गई 4 महीने की गर्भवती महिला इंदु साहू की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
आरोप है कि डॉक्टर के इंजेक्शन लगाते ही महिला की तबीयत बिगड़ी, उसे खून की उल्टियां हुईं और वह तड़पते हुए अपने पति की गोद में ही शांत हो गई।
खौफनाक मंजर : नाक से निकला झाग और खून – जब इंदु को
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पलारी ले जाया गया, तो वहां के दृश्य ने सबको झकझोर दिया। महिला की नाक से सफेद झाग और खून रिस रहा था – जो आमतौर पर किसी गलत दवा के घातक रिएक्शन का संकेत होता है। ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। विडंबना देखिए, जिस महिला ने खुद चलकर क्लिनिक में कदम रखा था, उसकी लाश अस्पताल की चौखट पर पहुंची।
रसूख के आगे झुका कानून? इस मामले में सबसे हैरान करने वाला
मोड़ तब आया जब अस्पताल में 4 घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद परिजनों ने अचानक ‘बिना पोस्टमॉर्टम’ कराए शव ले जाने का फैसला किया।
सवाल 1 : क्या सरपंच के राजनीतिक रसूख ने पीड़ित परिवार की आवाज दबा दी?
सवाल 2 : बिना पीएम (PM) कराए आनन-फानन में शव का अंतिम संस्कार क्यों किया गया?






