
राकी साहू लवन – समीपस्त ग्राम अहिल्दा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया. कथा का आयोजन संस्कार सामाजिक संगठन एवं ग्रामवासी अहिल्दा द्वारा किया जा रहा है.कथा वाचक गौरव जोशी महाराज ने कहा कि मित्रता करो तो भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा जैसी करो। सुदामा जितेंद्रिय एवं भगवान श्री कृष्ण के परम मित्र थे।भिक्षा मांगकर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे। गरीबी के बावजूद भी हमेशा भगवान के ध्यान में मग्न रहते।

पत्नी सुशीला सुदामा जी से बार-बार आग्रह करती कि आपके मित्र तो द्वारकाधीश हैं उनसे जाकर मिलो शायद वह हमारी मदद कर दें। सुदामा पत्नी के कहने पर द्वारका पहुंचते हैं और जब द्वारपाल भगवान श्रीकृष्ण को बताते हैं कि सुदामा नाम का ब्राम्हण आया है तो भगवान श्री कृष्ण यह सुनकर नंगे पैर दौङकर आते हैं और अपने मित्र को गले से लगा लेते हैं। चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पंडाल में सुदामा जी की दीन दशा देखकर लोग भाव विभोर हो गए.कुछ भजन गाए और शंध्या आरती हुई जिस श्रृद्धालु जमकर जुमे.




