
जांजगीर चांपा (शक्ति) – कात्रेनगर परिसर में भोजली का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। भोजली का त्योहार सिर्फ मित्रता का ही उत्सव नहीं है, बल्कि नई फसल की कामना के लिए गांवों में यह त्योहार मनाया जाता है।
संस्था के सचिव आदरणीय सुधीर देव जी ने भोजली माता को धूप दिखाकर पूजा अर्चना किए उसके बाद माताओं द्वारा भोजली गीत का सामूहिक गायन किया गया।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में महिलाएं एक-दूसरे को भोजली का दूब भेंट कर जीवन भर मित्रता का धर्म निभाने का संकल्प लेती हैं। भोजली तिहार के मौके पर आश्रम परिसर की माता बहनों ने भोजली की टोकरियां सिर पर रखकर तालाब किनारे पहुंची और विसर्जन किया गया। सभी पारंपरिक रस्मों के साथ तालाब में भोजली का विसर्जन किया गया।

आश्रम में निवासरत समस्त रुग्ण माता अस्वस्थ होने के कारण कही बाहर परिसर से नहीं जा सकती पर छत्तीसगढ़ी निवासी होने की वजह से छत्तीसगढ़ की लगभग सभी पारंपरिक त्योहारों को एक साथ पारस्परिक प्रेम के साथ परिसर के अंदर ही हर्षोल्लास के साथ मनाती हैं
इस बीच संस्था के सभी माता बहन व कार्यकर्ता इस भोजली विसर्जन में उपस्थित हुए ।।
संवाददाता – लोकनाथ साहू / मनमोहन




