बलौदाबाजार लवन

त्रिवेणी संगम चंगोरीपुरी धाम में पांच दिवसीय संत समागम समारोह का आयोजन

लवन, त्रिवेणी संगम चंगोरीपुरी धाम में पांच दिवसीय संत समागम समारोह का आयोजन प्रारंभ हो चुका है। शिवनाथ नदी, महानदी, और लीलगर नदी के संगम पर स्थित यह स्थल भौगोलिक रूप से अत्यंत समृद्ध है। लगभग 60 वर्षों से चली आ रही मेले की परंपरा का निर्वहन सद्गुरु कबीर धनी धर्मदास साहब सेवा समिति द्वारा किया जा रहा है। इस मेले में दूर-दूर से संत- महात्मा, सेवक – सती पहुंचते हैं जो सदगुरु कबीर साहब के वाणी वचनों का प्रचार प्रसार करते हैं। इस आयोजन में पधारे संतों ने आज के वर्तमान परिवेश में सदगुरु कबीर के वाणी की प्रासंगिकता को बताते हुए कहा की सदगुरु कबीर किसी धर्म जाति या पंथ विशेष के न होकर संपूर्ण मानव जगत के कल्याण की भावना से उनके उद्धार के लिए बातें कही है ।यदि उनकी वाणी वचनों को अंगीकार किया जाए तो हम क्षण मात्र में अपना कल्याण कर सकते हैं ।कार्यक्रम में ग्राम तिल्दा से पधारे संत तीरथ दास ने अपने उद्बोधन में कहा कि सदगुरु कबीर का प्राकट्य मुगल काल में उस समय हुआ जब मुस्लिम शासक थे परंतु उस समय सदगुरु कबीर ने बिना पक्ष विपक्ष को देखें मानव मात्र को जो मार्ग दिखाया वह एक मिसाल है । ऐसा कोई नहीं कर सकता । जहां एक और उन्होंने मुसलमान को फटकार वही हिंदुओं को भी आड़े हाथों लेकर समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर करने का कार्य किया। राजिम धमतरी से पधारे संतों ने मन-चित ,बुद्धि और अहंकार के विषय में बताते हुए इसे मानव वृत्ति बताया और इन सब से छुटकारा पाने के लिए सदगुरु कबीर साहब के वाणी वचनों को श्रेष्ठ बताया। संत समागम समारोह में ग्राम बम्हनपुरी से पधारी साध्वी मंटोरा माई ने घर-घर में व्याप्त कुरीति, संगत और कुविचार को दूर कर प्रत्येक घर में संध्या आरती के साथ सदगुरु कबीर की वाणी प्रसारित करने हेतु माताओं से आग्रह किया । उक्त कार्यक्रम महंत दीनदयाल साहब के मार्गदर्शन में संपन्न हो रहा है। समिति के अध्यक्ष फिरत राम कैवर्त्य, उपाध्यक्ष हेमंत कुमार साहू, सचिव रोशन दास मानिकपुरी , कोषाध्यक्ष भागीरथी साहू सहित प्रेमलाल ,बलिस्टर, कन्हैया, बाल गोविंद ,इतवारी, हीरालाल ,परमेश्वर, कमलेश, देव कुमार, चैतू दास, कृष्ण कुमार यदु, नारायण कैवर्त्य, नरोत्तम कैवर्त्य आदि प्रत्यक्ष रूप से कार्यक्रम को सफल बनाने में महती भूमिका निभा रहे हैं ।उक्त जानकारी समिति के सचिव रोशन दास मानिकपुरी ने दी।

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