लवन

पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय बलौदा बाजार में पराक्रम दिवस मनाया गया

लवन – पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय लवन में 23 जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 128वी जन्म जयंती के पावन अवसर पर पराक्रम दिवस विद्यालय में धूमधाम से मनाया गया।

पराक्रम दिवस के पावन अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक, शिक्षिकाएं, छात्र और छात्राओं द्वारा भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा पर पुष्पमालय और दीप प्रज्वलन करके पराक्रम दिवस मनाया गया। पराक्रम दिवस के पावन अवसर पर विद्यालय के नौवीं कक्षा के छात्र हर्षित वर्मा ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी के जीवन पर आधारित प्रश्नोत्तरी के माध्यम से छात्रों को नेताजी के बारे में विशेष जानकारी प्रदान की। इसके पश्चात आठवीं कक्षा के छात्र मास्टर त्रियांश वैष्णव और मास्टर ईशान सिदार कक्षा आठवीं की नेताजी सुभाष चंद्र बोस की स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न पहलू पर रोचक तथ्य अपने भाषण में प्रस्तुत किया।

पराक्रम दिवस के पावन अवसर पर विद्यालय के वरिष्ठ इतिहास शिक्षक श्री सत्येंद्र कुमार पाण्डेय ने नेताजी के बारे में विस्तार से बताया कि किस प्रकार उन्होंने ICS जैसे परीक्षा उत्तीर्ण करके प्रशासनिक पद धारण किया। और इस सुनहरे अवसर को ठोकर मार कर आजादी के महानायक बने। गांधी जी के विरोध के बावजूद कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए और गांधी जी के सम्मान को ध्यान में रखकर कांग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ दिया। श्री पाण्डेय जी ने यह भी बताया कि अपनी नजरबंदी के दौरान अंग्रेजो को चकमा देकर वह अफगानिस्तान के रास्ते जर्मनी पहुंचे, जहां जर्मनी के तनासाह हिटलर ने नेताजी की उपाधि दी और भारत की स्वतंत्रता में उनका सहयोग करने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विद्यालय के ग्रंथपाल श्री राजेंद्र सिका ने बताया कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 128वीं जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में सारा भारत वर्ष में मनाया जाता है। नेताजी सुभाषचंद्र बोस के बहु परिचित नारे तुम मुझे खून दो, में तुम्हे आजादी दूंगा, जय हिंद और दिल्ली चलो जैसे नारों से आजादी की लडाई को नई ऊर्जा देने वाले महान् स्वतंत्रता बिपलबी नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी,1897 को ओडिशा के कटक शहर में हुआ था। देश के स्वाधीनता आंदोलन के नायकों में से एक नेताजी की जीवनी उनके विचार और उनके कठोर त्याग आज के युवाओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है। आज के दिन जिसे पराक्रम दिवस के रूप में जाना जाता है। हमें उस अद्वितीय नेता की याद दिलाता है, उन्होंने अपनी निस्वार्थ, देश भक्ति और अदम्य साहस से भारत के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। नेताजी ने अपने जीवन में यह साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हो, तो कोई भी मुश्किल हमें हमारे लक्ष्य तक पहुंचने से रोक नहीं सकती। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को न केवल दिशा दी बल्कि एक नई ऊंचाई पर पहुंचाया। उनका यह विश्वास था कि केवल अहिंसा से स्वतंत्रता नहीं मिल सकती इसके लिए शारीरिक और मानसिक शक्ति का संचार जरूरी है। उन्होंने आजाद हिंद फौजी की स्थापना करके यह सिद्ध कर दिया कि संघर्ष की शक्ति से कोई भी बंधन तोड़ा जा सकता है।

कार्यक्रम के अगले कड़ी में विद्यालय के प्राचार्य श्रीमती भी गिरिजा ने बच्चों को पराक्रम दिवस की बधाई दी और बच्चों को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन दर्शन से सबक लेते हुए अनुशासन और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने के लिए हमेशा तपतर रहने के लिए कहा। आज के दिन हमें नेताजी के संघर्ष और बलिदान से यह सीखने की आवश्यकता है कि हम जीवन में किसी भी कठिनाई से डरे नहीं। हमें अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी महसूस करनी चाहिए। आज नेताजी की प्रेरणा से हम अपने सपनों को साकार करने के लिए अधिक मेहनत और लगन से काम करें। पराक्रम दिवस के कार्यक्रम को संचालन विद्यालय के ग्रंथपाल श्री राजेंद्र सिका जी के द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं जैसे मंदोदरी सेट, जीपी साहू, सत्येंद्र कुमार पाण्डेय, ग्रंथपाल श्री राजेंद्र सिका, राकेश सिंह, अरूप दास, वर्षा मोहन, ममता, प्रशांत गायकवाड, प्रदीप कुमार, ज्ञान प्रकाश, मोनिका ठाकुर, अमित वर्मा, विशाखा डॉगे, धनेश्वरी, राघवेंद्र सोनार, अमित वर्मा, दिनेश यादव, शालिनी, संदीप मालव्य, रंजन उपाध्याय, कांतिलाल, नवनीत पटेल, बी के बघेल, पोखर सिंह, राहुल रॉय, सरजू, धनेश्वर साहू, रोहित वर्मा उपस्थित रहे।

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