
राकी साहू लवन -समीपस्त ग्राम धाराशिव में चल रहे शिवपुराण के तीसरे दिन सती खण्ड,51 शक्तिपीठ की कथा सुनाई गई। कथा व्यास पंडित खिलेंद्र दुबे ने बताया कि कैसे 51 शक्तिपीठ पृथ्वी में स्थापित हुए ।
पौराणिक कथा के मुताबिक, माता सती के पिता दक्ष प्रजापति ने कनखल नाम का स्थान जिसे हरिद्वार के नाम से जाना जाता है वहां एक महायज्ञ किया. उस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र समेत सभी देवी-देवताओं को बुलाया गया लेकिन भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया गया. माता सती को इसकी जानकारी मिली. पति को यज्ञ में आमंत्रित न करने का जवाब जानने के लिए वो पिता दक्ष के पास पहुंची.
अपने पिता से जब यह सवाल किया तो उन्होंने भगवान शिव के लिए अपशब्द कहे. उनका अपमान किया. माता सती अपमान से क्षुब्ध होकर उसी यज्ञ के अग्निकुंड में अपने प्राणों की आहुति दे दी. भगवान शिव को इसी जानकारी मिलने पर वो क्रोधित हो उठे और उनका तीसरा नेत्र खुलने से सम्पूर्ण धरती, आकाश, पर भयंकर प्रलय आ गया।
क्रोध में भोलेनाथ तांडव करने लगे और उस स्थान पर गए जहां माता सती का शरीर था. उन्होंने माता सती का शरीर उठाया और कंधे पर रखा. भगवान शिव का तांडव जारी रहा. उन्होंने कैलाश की ओर रुख किया. पृथ्वी पर बढ़ते प्रलय का खतरा देखते हुए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को खंड-खंड करना शुरू कर दिया. इस तरह उनके शरीर के अलग-अलग हिस्से अलग-अलग स्थानों पर गिरे. ऐसा 51 बार हुआ, इस तरह 51 शक्तिपीठों की स्थापना हुई.कथा श्रवण करने भारी संख्या में धाराशिव के ग्राम पहुच रहे हैं।




