सिसदेवरी मैं श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजनभगवान के नाम लेने से ही बैकुंठ की प्राप्ति होती है पंडित योगेश

डोमार साहू (गिधपुरी)ग्राम सिसदेवरी में संगीत मय श्रीमद् भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन सरस्वती महिला रामायण मंडली एवं ग्रामवासी के तत्वाधान में यह आयोजन रखा गया है। कथावाचक पंडित योगेश वत्स वह पारायण कर्ता युवराज शर्मा, कुंदन शर्मा, द्वारा बड़ी ही विस्तार पूर्वक श्रीमद् भागवत कथा का रसपान किया जा रहा है समय 1 बजे से 5 बजे तक रखा गया है जिसे सुनने के लिए गांव सहित आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भागवत कथा का आनंद ले रहे हैं। आचार्य जी को कीर्तन मंडली द्वारा कीर्तन भजन करते हुए उनके निवास से कथा स्थान लाते हैं तत्पश्चात पूजा अर्चना के पश्चात श्रीमद् भागवत कथा प्रारंभ किया जाता है। कथा स्थल को बहुत ही सुंदर तरीका से लाइट एवं फूल माला से सजाई गई है जो की आकर्षण का केंद्र है। महिला मंडली द्वारा जलपान का भी व्यवस्था भी रखा गया है श्रोतागण के लिऐ। पंडित योगेश ने कहा कि आप सभी बहुत ही एकत्रित होकर श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करें भगवान कहते हैं कि जहां नियमित मेरी कृपा होती है वहां वैष्णव गण प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से विद्यमान रहते हैं जो मनुष्य सदा पूजा अर्चना में रहते हैं उन पर कलि का वर्ष नहीं चलता इसलिए हमें श्रीमद् भागवत कथा अवश्य सुननी चाहिए। हम सभी को गौ माता की रक्षा करना चाहिए और सनातन धर्म का पालन जरूर करें और अपने परिवार एवं बच्चों को संस्कार अवश्य दें ताकि आने वाला कल उनका उज्जवल रहे पंडित जी ने कहा कि अजामिल की कथा श्रीमद्भागवत पुराण से ली गई है, जो एक ब्राह्मण की कहानी है जो अपने जीवन के अंत में अपने पुत्र ‘नारायण’ को पुकारते हुए अनजाने में भगवान का नाम लेता है, जिससे उसे मोक्ष प्राप्त होता है और उसे भगवान विष्णु के धाम वैकुंठ ले जाया जाता है, यह कथा सिखाती है कि अंत समय में भगवान का नाम लेने से कैसे पापों का नाश होता है और उद्धार मिलता है। अजामिल कन्नौज का एक गुणी और विद्वान ब्राह्मण था, जो वेदों का ज्ञाता था और अतिथियों का सत्कार करता था। एक दिन, फूल लाने के बहाने वह जंगल गया और वहाँ एक महिला के मोहजाल में फंस गया। उसने अपने परिवार को त्याग दिया और उस महिला के साथ रहने लगा, जिससे वह पाप कर्मों में लिप्त हो गया। अंतिम समय और उद्धार: मृत्यु निकट आने पर, यमदूत उसे लेने आए। भयभीत होकर, अजामिल अपने सबसे छोटे पुत्र को पुकारने लगा, जिसका नाम ‘नारायण’ था। वह बार-बार “नारायण! नारायण!” चिल्ला रहा था। अजामिल के मुख से ‘नारायण’ नाम सुनते ही, भगवान विष्णु के पार्षद वहाँ आ गए और यमदूतों को रोक दिया। उन्होंने तर्क दिया कि अजामिल ने मरते समय भगवान के पवित्र नाम का उच्चारण किया है, जिससे उसके सभी पाप नष्ट हो गए हैं। इस प्रकार, अजामिल को मोक्ष प्राप्त हुआ और उसे भगवान के पार्षदों के साथ स्वर्ण विमान में बिठाकर वैकुंठ ले जाया गया।यह कथा दर्शाती है कि चाहे कोई व्यक्ति कितना भी पापी क्यों न हो, यदि वह अपने जीवन के अंत में श्रद्धा या विवशता से ही सही, भगवान के नाम का स्मरण कर लेता है, तो उसे मुक्ति मिल सकती है।भगवान का नाम अत्यंत शक्तिशाली है और यह सभी पापों का नाश कर सकता है। इस अवसर पर परीक्षित कृष्ण कुमार चंद्राकर पूर्व अध्यक्ष जिला सहकारी केंद्रीय रायपुर योगेश चन्द्राकार प, उमाशंकर तिवारी प, यशवंत तिवारी चन्द्राकर, राधे चन्द्राकर, मुकेश कुमार,भोजराम चंद्राकर गणेश्वर चंद्राकर सनी चंद्राकर खोवा चंद्राकर कौशल चंद्राकर विश्राम चंद्राकर गोरख चंद्राकर राजेश चंद्राकर श्रवण चंद्राकर, राजकमल चंद्राकर पवन चंद्राकर नरेंद्र चंद्राकर चंपा चंद्राकर भुवनेश्वरी शर्मा सुभद्रा चंद्राकर पुष्पा तिवारी इंद्राणी तिवारी नबिना झा प्रिती झा तनु चंद्राकर अमृत चंद्राकर लक्ष्मी चंद्राकर विद्या चंद्राकर सहित आसपास के ग्रामीण एवं महिला पुरुष बड़ी संख्या में उपस्थित थे।







