लवन

बलौदाबाजार में 15 साल से इंसाफ की लड़ाई,अपनी ही जमीन के लिए भटक रहा किसान मोहितराम वर्मा

बलौदाबाजार – बलौदाबाजार जिला प्रशासन ने मोहितराम वर्मा क़ी समस्या का लिया संज्ञान,जल्द समाधान का दिलाया भरोसा

प्रशासन के आश्वासन पर मोहितराम ने जातायी संतुष्टि

विभिन्न माध्यमों में प्रसारित समाचार का कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने संज्ञान में लेकर  मोहितराम वर्मा के ग्राम अर्जुनी में स्थित पुश्तैनी जमीन पर अतिक्रमण के मामले का जल्द समाधान के लिये एसडीएम बलौदाबाजार को निर्देशित किया। उन्होंने दस्तावेजों का जांच व परीक्षण कर नियमानुसार तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिये। 
प्रशासन के द्वारा समाधान का जल्द भरोसा दिलाने पर मोहितराम वर्मा ने  संतुष्टि व्यक्त करते हुए प्रशासन के प्रति आभार जताया हैं। उन्होंने कहा हैं कि 7 मई को मेरे द्वारा दिये आवेदन का प्रशासन द्वारा संज्ञान में लेकर उचित कार्यवाही करने और 15 दिन के अंदर जमीन अतिक्रमण मुक्त कराने का आश्वासन दिये हैं जिस पर मुझे संतुष्टि हैं।
एसडीएम  बलौदाबाजार प्रकाश कोरी ने बताया कि 
मोहितराम वर्मा निवासी ग्राम अर्जुनी तहसील बलौदाबाजार द्वारा ग्राम अर्जुनी प. ह.नं. 10 तहसील बलौदाबाजार स्थित भूमि खसरा नंबर 183 रकबा 0.615 हेक्टेयर भूमि पर अनावेदक हीरालाल, जवाहरलाल पिता मोहन लाल द्वारा अनाधिकृत कब्जा हटाये जाने हेतु आवेदन कलेक्टर जिला बलौदाबाजार के समक्ष प्रस्तुत कर अनिश्चित कालीन भूख हडताल एवं आत्मदाह किए जाने सूचना दी गई है। इस संबंध में कलेक्ट कुलदीप शर्मा के. निर्देश पर जिस पर एसडीएम एवं तहसीलदार बलौदाबाजार द्वारा तत्काल संज्ञान लेकर उक्त संबंध में कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है उक्त कार्यवाही में आवेदक द्वारा  संतुष्टि जाहिर किया गया हैं।

भूख हड़ताल और आत्मदाह की चेतावनी

  • लगातार देरी और निराशा के बाद अब मोहितराम वर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिला प्रशासन के सामने भूख हड़ताल करेंगे. जरूरत पड़ी तो आत्मदाह जैसा कदम भी उठा सकते हैं. हालांकि स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें ऐसा कदम न उठाने की सलाह दी है. प्रशासन पर उठ रहे सवाल
    इस मामले के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं, क्या हाईकोर्ट के आदेश का पालन करवाना प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है? आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? जानकारों का कहना है कि यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि न्यायिक आदेशों के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही का भी मुद्दा बन गया है. यदि अदालतों के आदेश जमीन पर लागू नहीं होंगे, तो आम लोगों का न्याय व्यवस्था से भरोसा कमजोर हो सकता है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button