लाहोद

वर्ष 2024 के तीसरी नेशनल लोक अदालत में 8800 से अधिक प्रकरणों का निराकरण हुए

विजय सेन लाहोद

बलौदा बाजार l दिनांक 21.09.2024 को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण बिलासपुर के मार्गदर्शन एवम् राकेश बिहारी घोरे, प्रधान जिला न्यायाधीश / अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार के निर्देशन में जिला न्यायालय बलौदाबाजार एवं तहसील न्यायालय भाटापारा, कसडोल, सिमगा में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया है नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ राकेश बिहारी घोरे प्रधान जिला न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बलौदाबाजार के द्वारा माँ सरस्वती के चैलचित्र पर माल्यापर्ण एवं दीप प्रज्जवल कर प्रातः 10.30 किया गया। शुभारंभ कार्यक्रम में न्यायाधीशगण, अधिवक्तागण, कर्मधारीगण, पैरालीगल वॉलिटियर, प्रकरणों के पक्षकार उपस्थित रहे।
राकेश बिहारी घोरे प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलौदाबाजार द्वारा खंडपीठ के पीठासीन अधिकारियों से लोक अदालत में निराकृत प्रकरण की संख्यात्मक जानकारी लेते हुए कहा कि पक्षकारों को राजीनामा किये जाने हेतु प्रोत्साहित करते हुए अधिक से अधिक न्यायालयों में लंबित प्रकरण राजीनामा के आधार पर निराकृत किये जाने का प्रयास किया जावे तथा विद्युत विभाग, बैंक नगर पालिका के पंडाल पर जाकर उन्हें प्री लिटिगेशन के निराकरण में अत्यधिक जोर देते हुए कहा कि बकाया रूपये में पक्षकारों को छूट देकर किश्तों में बकाया राशि की सुविधा प्रदान करें।

नेशनल लोक अदालत पर जिला न्यायालय परिसर पर निशुल्क स्वास्थय शिविर का आयोजन जिला अस्पताल बलौदाबाजार से रामन्दय स्थापित कर आयोजित किया गया। पक्षकार एवं कर्मचारियों ने निःशुल्क स्वास्थय शिविर का लाभ उठाया।

नेशनल लोक अदालत हेतु कुल 13. खण्डपीठ का गठन किया गया है। परिवार न्यायालय बलौदाबाजार हेतु 01 खण्डपीठ जिला न्यायालय हेतु 06, तहसील न्यायालय भाटापारा हेतु 04 तथा तहसील न्यायालय कसडोल, सिगगा हेतु 01-01 खंडपीठ का गठन किया गया है। राजस्व न्यायालय के प्रकरणों के संबंध में कुल 15 खंडपीठ का गठन किया गया ।

नेशनल लोक अदालत में 8800 से अधिक प्रकरण नेशनल लोक अदालत में निराकृत हुए।

परिवार न्यायालय के लंबित प्रकरण में पति-पत्नि समझौता कर राजीखुशी अपने घर गये :-

परिवार न्यायालय में पत्नि द्वारा भरण पोषण का प्रकरण पेश किया तथा पति ने धारा 9 हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत् दाम्पत्य अधिकारों की पुर्नस्थापना का प्रकरण पेश किया था। उक्त दोनों मामलों के लंबित होने के दौरान उभयपक्षों को सुलह कराये जाने जाने के परिणाम स्वरूप समझाईश दिये जाने के पश्चात् लोक अदालत में पति-पत्नि एक साथ निवास किये जाने का फैसला लिये जाने पर उनके प्रकरणों को राजीनामा के आधार पर समाप्त किया गया ।

पत्नि ने पति के विरूद्ध थाने मे कराये रिपोर्ट को राजीनामा के आधार पर समझौता कर समाप्त किया-

खंडपीठ क्रमांक 05 के पीठासीन अधिकारी अजय कुमार खाखा एवं पैनल अधिवक्ता द्वारा पत्नि द्वारा धारा 294,323 भा.दं.वि. के लिखाये गये अपराध पर लंबित दांडिक प्रकरण में समझौता किये जाने का प्रयास किया गया। पत्नि ने पति के खिलाफ लिखाये गये रिपोर्ट में समझौता किया तथा राजीनामा के आधार पर प्रकरण समाप्त किया गया। पति-पत्नि खुशहाल दापत्य जीवन के लिए एक होकर अपने घर गये।

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