ग्राम वटगन में दिव्य कृष्ण लीला का मंचन

डोमार साहू ( गिधपुरी) ग्राम पंचायत वटगन में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दौरान भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। वृंदावन धाम से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक पंडित श्री श्री 108 उत्कृष्ट शुक्ला जी ने श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ-साथ गोवर्धन पर्वत लीला का सजीव एवं प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम में रुक्मणि विवाह की भव्य झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। झांकी के दर्शन मात्र से पूरा पंडाल जय श्रीकृष्ण के उद्घोष से गूंज उठा। सुंदर साज-सज्जा और भावनात्मक प्रस्तुति ने समस्त ग्रामवासियों में उत्साह और भक्ति का संचार किया।
कथावाचक पंडित श्री उत्कृष्ट शुक्ला जी ने अपने प्रवचनों में भक्ति, धर्म और मानव जीवन के मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन को सही मार्ग दिखाने वाली अमृतधारा है। कथा श्रवण से ग्रामवासियों में आपसी सद्भाव, धार्मिक चेतना और संस्कारों का विकास हुआ।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, श्रद्धालुजन एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
घोटिया पलारी। ग्राम पंचायत वटगन में आयोजित श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के दौरान भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। वृंदावन धाम से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक पंडित श्री श्री 108 उत्कृष्ट शुक्ला जी ने श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ-साथ गोवर्धन पर्वत लीला का सजीव एवं प्रेरणादायक प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
कार्यक्रम में रुक्मणि विवाह की भव्य झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। झांकी के दर्शन मात्र से पूरा पंडाल जय श्रीकृष्ण के उद्घोष से गूंज उठा। सुंदर साज-सज्जा और भावनात्मक प्रस्तुति ने समस्त ग्रामवासियों में उत्साह और भक्ति का संचार किया।
कथावाचक पंडित श्री उत्कृष्ट शुक्ला जी ने अपने प्रवचनों में भक्ति, धर्म और मानव जीवन के मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन को सही मार्ग दिखाने वाली अमृतधारा है। कथा श्रवण से ग्रामवासियों में आपसी सद्भाव, धार्मिक चेतना और संस्कारों का विकास हुआ।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधि, श्रद्धालुजन एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।







