
लवन – छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोकसंस्कृति और लोकगीतों की झलक दीपावली पर्व के नजदीक आते ही गांवों में दिखाई देने लगी है। क्षेत्र के गांवों में बच्चे टोली बनाकर घर-घर पहुंच रहे हैं और पारंपरिक सुवा गीत गाकर लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।
दीपावली के अवसर पर सुवा गीत गाने की परंपरा छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा रही है। बच्चे समूह में एकत्र होकर पारंपरिक अंदाज में सुवा गीत गाते हैं। उनकी मधुर आवाज से गांवों का माहौल उत्सवमय हो जाता है। ग्रामीण भी बच्चों के इस पारंपरिक आयोजन को उत्साह के साथ देखते हैं और उन्हें प्रोत्साहित करते हैं।

आधुनिकता के इस दौर में भी बच्चों द्वारा पारंपरिक सुवा गीत गाने की परंपरा का निर्वहन करना छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति के संरक्षण की दिशा में एक सुखद पहल है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करते हैं। दीपावली के आगमन के साथ ही गांवों में सुवा गीतों की गूंज त्योहार की खुशियों को और बढ़ा रही है।


