
राकी साहू लवन .के अहिल्दा रोड स्थित शास्त्री भवन में सुनील तिवारी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ कथा के दूसरे दिन कथा व्यास आचार्य पंडित मनोज तिवारी महाराज ( साराडीह ) ने परीक्षित जन्म सुखदेव आगमन की कथा सुनाई उन्होंने युद्ध में गुरु द्रोण के मारे जाने से क्रोधित होकर उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोधित होकर पांडवों को मारने के लिए ब्रह्मास्त्र चलाया। ब्रह्मास्त्र से लगने से अभिमन्यु की गर्भवती पत्नी उत्तरा के गर्भ से परीक्षित का जन्म हुआ परीक्षित जब बड़े हुए नाती पोतों से भरा पूरा परिवार था सुख वैभव से समृद्ध राज्य था वह जब 60 वर्ष के थे तो एक दिन वह क्रमिक मुनि से मिलने उनके आश्रम गए उन्होंने आवाज लगाई लेकिन तप में लीन होने के कारण मुनि ने कोई उत्तर नहीं दिया तो राजा परीक्षित ने स्वयं का अपमान मानकर निकट मृत पड़े सांप को क्रमिक मुनि के गले में डाल कर चले गए अपने पिता के गले में मृत सांप को देख मुनि के पुत्र ने श्राप दे दिया कि जिस किसी ने भी मेरे पिता के गले में मृत सांप को डाला है उसकी मृत्यु सात दिनों के अंदर सांप के डसने से हो जाएगी ऐसा ज्ञात होने पर राजा परीक्षित ने विद्वानों को अपने दरबार में बुलाया और उनसे राय मांगी उस समय विद्वानों ने उन्हें सुखदेव का नाम सुझाया और इस प्रकार सुखदेव का आगमन हुआ । उन्होंने आगे कहा कि हम जीतना समय रोज मोबाइल में देते हैं उतना समय यदि भगवान की भक्ति में दें तो हमारा जीवन स्वर्ग बन जाएगा भागवत का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति को सत्य के मार्ग पर लाना है वही बड़ी संख्या में नगरवासी कथा का लाभ ले रहे हैं।








