पुरानी रूढ़ियों को तोड़ विधवा माता ने बेटे को मौर सौंपकर विदा की बारात, अर्जुनी (बलौदाबाजार) में पेश की अनूठी मिसाल

डोमार साहू ( गिधपुरी) सामाजिक बदलाव और प्रगतिशील सोच की एक नई मिसाल आज ग्राम अर्जुनी (बलौदाबाजार) में देखने को मिली। यहाँ साहू परिवार की एक विधवा माता, श्रीमती टेकेश्वरी साहू ने समाज की सदियों पुरानी और दकियानूसी परंपराओं की बेड़ियों को दरकिनार करते हुए, अपने सुपुत्र चि. हेमंत साहू के विवाह के अवसर पर स्वयं ‘मौर’ सौंपकर बारात प्रस्थान करवाई।
आमतौर पर सामाजिक वर्जनाओं के कारण विधवा महिलाओं को मांगलिक कार्यों के केंद्र से दूर रखा जाता है, लेकिन श्रीमती टेकेश्वरी साहू ने इस रुढ़ीवादी परंपरा के उलट खुद आगे बढ़कर बेटे को आशीर्वाद दिया और रस्में पूरी कीं। उनके इस कदम की चारों ओर सराहना हो रही है।
समाज के लिए अनुकरणीय पहल:
उपस्थित जनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने इस कार्य को समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश बताया है। उनका मानना है कि माता का स्थान सर्वोपरि है और किसी भी परिस्थिति में उन्हें शुभ कार्यों से वंचित रखना अनुचित है। साहू परिवार द्वारा उठाए गए इस क्रांतिकारी कदम ने यह साबित कर दिया है कि समय के साथ रूढ़ियों को छोड़ना और मानवता व सम्मान को प्राथमिकता देना ही असली संस्कार है।
यह पहल न केवल अर्जुनी बल्कि संपूर्ण साहू समाज और अन्य समाजों के लिए एक मिसाल बनकर उभरी है, जो भविष्य में सामाजिक समानता और महिलाओं के सम्मान की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।






