

लवन, पुरातत्व विभाग द्वारा डमरू क्षेत्र में 2013-14 मे कराई गई खुदाई के दौरान प्राप्त हुए महत्वपूर्ण प्राचीन अवशेषों को फिलहाल एक बंद कमरे में रख दिया गया है लेकिन उनके संरक्षण और रखरखाव पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है इससे क्षेत्र के इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुँचने की आशंका बढ़ गई है स्थानीय लोगों और इतिहास प्रेमियों का कहना है कि खुदाई में मिले ये अवशेष अत्यंत महत्वपूर्ण हैं जो क्षेत्र के प्राचीन वैभव और धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं इसके बावजूद संबंधित विभागों की उदासीनता साफ दिखाई दे रही है बंद कमरे में रखे जाने के कारण न तो इन अवशेषों का वैज्ञानिक संरक्षण हो पा रहा है और न ही आम जनता को इनके दर्शन का अवसर मिल रहा है स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि डमरू स्थित मंदिर और उसके आसपास के क्षेत्र का समग्र जीर्णोद्धार किया जाए साथ ही खुदाई में प्राप्त अवशेषों को मंदिर परिसर के पास एक सुरक्षित और सुव्यवस्थित स्थान पर प्रदर्शित किया जाए ताकि श्रद्धालु और पर्यटक दोनों ही इस ऐतिहासिक धरोहर से परिचित हो सकें लोगों का कहना है कि यदि सरकार और पुरातत्व विभाग द्वारा उचित संरक्षण सौंदर्यीकरण और सुविधाएँ प्रदान की जाएँ तो यह स्थल धार्मिक पर्यटन के रूप में भी विकसित हो सकता है जिससे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी वही इन दिनों नवरात्रि के पावन अवसर पर डमरू स्थित माँ महामाया मंदिर में भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है मंदिर के कपाट खुलते ही माता के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा है प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी माता के दर्शन हेतु स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं डमरू की माँ महामाया के प्रति भक्तों में अटूट विश्वास है यही कारण है कि इस वर्ष भी मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से तेल और घी के दीपक प्रज्वलित करने वाले भक्तों की हर मुराद पूरी होती है। मंदिर समिति द्वारा तेल और घी की ज्योत के लिए विशेष व्यवस्था की गई है जिसकी देखरेख के लिए समिति दिन-रात जुटे हुए हैं सुबह की पहली आरती से लेकर देर रात तक मंदिर में भक्तों का ताँता लगा रहता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुगम दर्शन के लिए मंदिर समिति द्वारा व्यापक इंतजाम किए है वही जनपद सदस्य श्रीमती प्रमिला साहू एवं ग्रामवासी रामलाल साहू, सुशील यादव गाँधी राम साहू, रामायण साहू नें बताया की प्राचीन अवशेसो के रख रखाव हेतु पूर्व मे कई बार मांग किया गया था लेकिन शासन प्रसासन द्वारा ध्यान नहीं देने के कारण वह ठन्डे बस्ते चला गया है अब देखना यह है कि प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर विषय पर कब तक संज्ञान लेते हैं और डमरू क्षेत्र की इस अमूल्य विरासत को बचाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं





