
(रॉकी साहू लवन) ग्राम डमरू निवासी स्व. चित्ररेखा सेन पति द्वारिका प्रसाद सेन का रविवार को निधन हो गया। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। नियति का विधान देखिए कि चित्ररेखा सेन के परिवार में कोई पुत्र (भाई) नहीं है। उनकी तीन सुयोग्य पुत्रियाँ हिमानी सेन, नीलम सेन और सुगंधा सेन हैं।
माता के निधन के बाद अंतिम संस्कार और क्रिया-कर्म की घड़ी आई तो सवाल उठा कि मुखाग्नि कौन दे ऐसे में परिवार की सबसे बड़ी बेटी हिमानी सेन ने हिम्मत और हौसला दिखाते हुए आगे कदम बढ़ाया। उन्होंने न सिर्फ अपने माता-पिता के प्रति अटूट प्रेम और समर्पण का परिचय दिया, बल्कि परंपराओं को तोड़ते हुए एक बेटे की भूमिका निभाते हुए अपनी माँ की चिता को मुखाग्नि दी बेटियाँ किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं होतीं इस बात को ग्राम डमरू की हिमानी सेन ने सच साबित कर दिखाया है। कठिन समय में परिवार का संबल बनकर उन्होंने यह संदेश दिया कि माता-पिता के प्रति फर्ज निभाने के लिए संतान का बेटा होना जरूरी नहीं, बल्कि सच्ची निष्ठा और प्रेम होना काफी है। बेटी हिमानी सेन द्वारा उठाए गए इस साहसिक और भावनात्मक कदम की पूरे ग्राम डमरू और आसपास के क्षेत्र में गहरी प्रशंसा हो रही है। ग्रामीणों और रिश्तेदारों का कहना है कि आज के दौर में बेटियों ने हर क्षेत्र में बेटों के बराबर कंधे से कंधा मिलाकर यह साबित कर दिया है कि वे माता-पिता के हर सुख-दुःख और अंतिम समय में भी समान रूप से योग्य और सक्षम हैं इस मर्मस्पर्शी दृश्य को देखकर वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखें नम थीं, और सभी ने हिमानी के इस साहस को नमन किया।




