
( रॉकी साहू लवन ) ग्राम डमरू और आसपास के ग्रामीण आज के आधुनिक युग में भी बुनियादी बैंकिंग सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गांव में एक भी बैंक शाखा न होने के कारण किसानों और ग्रामीणों को अपने ही खून-पसीने की कमाई निकालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। धान बेचने के बाद भुगतान प्राप्त करने के लिए किसानों को 17 से 20 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं
बड़ी आबादी पर सुविधाओं का अभाव
ग्राम डमरू क्षेत्र की एक बड़ी आबादी का केंद्र है यहाँ आसपास के कई छोटे गांव अपनी जरूरतों के लिए डमरू पर निर्भर हैं व्यापारिक और कृषि गतिविधियों के लिहाज से यह क्षेत्र काफी सक्रिय है लेकिन विडंबना यह है कि यहाँ किसी भी राष्ट्रीयकृत या सहकारी बैंक की शाखा नहीं है विदित हो की वर्तमान में धान खरीदी का सीजन होने के कारण किसानों के खातों में राशि पहुंच रही है लेकिन इस राशि को निकालने के लिए किसानों को पूरा दिन खराब करना पड़ता है साथ ही बैंक से बड़ी रकम निकालकर वापस गांव आते समय किसानों को हमेशा लूटपाट या अनहोनी का डर बना रहता है सुनसान रास्तों पर नकदी लेकर चलना किसी खतरे से कम नहीं है वही सिर्फ किसान ही नहीं बल्कि गांव के बुजुर्ग विधवा महिलाएं और छात्र भी इस समस्या से जूझ रहे हैं वृद्धावस्था पेंशन या छात्रवृत्ति निकालने के लिए उन्हें भी इतनी दूर जाना पड़ता है क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि ग्राम डमरू की आबादी को देखते हुए यहाँ तत्काल किसी बैंक की शाखा या कम से कम एक ग्राहक सेवा केंद्र की सुविधा उपलब्ध कराई जाए ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में बैंकिंग सुविधा मिल जाए तो समय और पैसे दोनों की बचत होगी और सुरक्षा का जोखिम भी कम होगा




