
राकी साहू लवन- समीपस्त ग्राम मरदा में 1 फरवरी से चल रहे भव्य श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सप्तम दिवस कथा वाचिका बाल विदुषी भक्ति देवी ने कंस वध का वर्णन करते हुए बताया कि दुष्ट कंस ने अपनी बहन देवकी के नवजात संतानों की भी हत्या करा दी. लेकिन आठवीं संतान कृष्ण का बाल भी बांका न कर सके और कृष्ण के हाथों की कंस का वध हुआ.
आगे भगवान श्री कृष्ण-रुक्मणी के विवाह का प्रसंग सुनाया गया। भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी का वेश धारण किए बाल कलाकारों पर श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर स्वागत कर विवाह के मंगल गीत गाकर नृत्य किया। बाल विदुषी भक्ति देवी बलौदाबाजार ने श्रद्धालुओं को कथा के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि रुक्मणी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री और साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार थी। रुक्मणी ने जब देवर्षि नारद के मुख से श्रीकृष्ण के रूप, सौंदर्य एवं गुणों की प्रशंसा सुनी तो उसने मन ही मन श्रीकृष्ण से विवाह करने का निश्चय किया। रुक्मणी का बड़ा भाई रुक्मी श्रीकृष्ण से शत्रुता रखता था और अपनी बहन का विवाह राजा दमघोष के पुत्र शिशुपाल से कराना चाहता था। रुक्मणी को जब इस बात का पता चला तो उन्होंने एक ब्राह्मण संदेशवाहक द्वारा श्रीकृष्ण के पास अपना परिणय संदेश भिजवाया। तब श्रीकृष्ण विदर्भ देश की नगरी कुंडीनपुर पहुंचे और वहां बारात लेकर आए शिशुपाल व उसके मित्र राजाओं शाल्व, जरासंध, दंतवक्त्र, विदु रथ और पौंडरक को युद्ध में परास्त करके रुक्मणी का उनकी इच्छा से हरण कर लाए। तत्पश्चात श्रीकृष्ण ने द्वारिका में अपने संबंधियों के समक्ष रुक्मणी से विवाह किया।
प्रत्येक दिन कथा के अनुसार विशेष झांकी भी प्रस्तुत की जा रही है।
झांकी का सदृश आनंद भक्त जन ले रहे हैं।





