
डोमार साहू ( गिधपुरी) ग्राम भरूवाडीह में आयोजित तीन दिवसीय भव्य सत्संग कार्यक्रम के दूसरे दिन आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार रहा। कार्यक्रम में आमीन माता के ओजस्वी प्रवचनों और बाहर से पधारे संतों की वाणी ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
जीव दया और भक्ति ही सबसे बड़ा पुण्य: माता भुवन ज्योति
शाम 4 बजे माता साहेब भुवन ज्योति जी का आगमन हुआ, जिनका श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। अपने संबोधन में उन्होंने ‘जीव दया’ और ‘आत्म भक्ति’ पर विशेष जोर दिया। माता जी ने कहा, “जीवों पर दया करना और अपनी आत्मा की भक्ति में लीन होना ही संसार में सबसे बड़ा पुण्य है। इसके बिना मानव जीवन अधूरा है।”
कबीर साहेब का ‘शब्द-बिगुल’
सतगुरु कबीर साहेब की अमृतवाणी का गुणगान करते हुए उन्होंने एक मार्मिक उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जहाँ प्राचीन काल में राजा-महाराजा बिगुल बजाकर जनता के मन में भय पैदा करते थे, वहीं कबीर साहेब ने ज्ञान का ऐसा ‘बिगुल’ बजाया जिससे लोगों का डर समाप्त हो गया। कबीर साहेब की वाणी और उनके शब्द समाज को डराने के लिए नहीं, बल्कि सोए हुए विवेक को जगाने के लिए हैं।
भक्ति में लीन हुए श्रद्धालु
कार्यक्रम के दौरान बाहर से आए साहेबों ने अपनी मधुर वाणी और भजनों से पूरे वातावरण को भक्तिमय कर दिया। सत्संग में बड़ी संख्या में ग्रामीण और दूर-दराज से आए अनुयायी उपस्थित रहे, जिन्होंने कबीर साहेब के बताए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। आयोजन समिति और समस्त ग्रामीणों ने क्षेत्र के धर्मप्रेमियों से अपील की है कि कल अंतिम दिन के सत्संग में अत्यधिक संख्या में उपस्थित होकर अमृतमयी वाणी का श्रवण करें और सत्संग के लाभ के साथ-साथ प्रसाद भंडारा ग्रहण कर पुण्य के भागी बनें।








